मेरठ: तलाक के बाद बेटी का 'राजकुमारी' जैसा भव्य स्वागत! जज पिता ने "I Love My Daughter" पहनकर दुनिया को दिया बड़ा संदेश
मेजर से तलाक के बाद प्रणिता शर्मा का मायके में ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत! रिटायर्ड जज पिता ने बेटी की खुशियों को दी प्राथमिकता
मेरठ से एक ऐसी हृदयस्पर्शी खबर सामने आई है, जिसने भारतीय समाज की सदियों पुरानी बेड़ियों को एक झटके में तोड़ दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जब बेटी की शादी टूटती है, तो परिवार सोग मनाता है, लेकिन यहाँ नजारा बिल्कुल उल्टा था। मेजर से तलाक लेकर जब प्रणिता शर्मा अपने पिता के घर पहुंचीं, तो उनका स्वागत आंसुओं से नहीं, बल्कि ढोल की थाप और फूलों की बारिश के साथ हुआ।
"I Love My Daughter" - समाज को झकझोर देने वाला संदेश
यह घटना केवल एक पिता के प्रेम की नहीं, बल्कि एक रिटायर्ड जज की दूरदर्शिता की कहानी है। प्रणिता के पिता ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी बेटी को एक पल के लिए भी यह महसूस न हो कि उसने जीवन में कुछ खोया है। पूरे परिवार ने खास तौर पर तैयार की गई सफेद टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था— "I Love My Daughter"।
प्रणिता की शादी भारतीय सेना के एक मेजर के साथ हुई थी। लेकिन आपसी सामंजस्य न बैठ पाने के कारण रिश्ता टूटने के कगार पर पहुंच गया। समाज में जहाँ तलाक को आज भी एक कलंक (Stigma) की तरह देखा जाता है, वहाँ एक रिटायर्ड जज पिता का यह कदम उन लाखों लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण है जो सिर्फ "लोग क्या कहेंगे" के डर से जहरीले रिश्तों को ढो रही हैं।
घुट-घुट कर जीने से बेहतर है सम्मान के साथ घर वापसी
प्रणिता के पिता ने मीडिया से बात करते हुए बड़ी ही बेबाकी से कहा, "जब हमने अपनी बेटी की शादी की थी, तो वह एक उत्सव था। आज वह एक ऐसे बंधन से आजाद होकर आई है जहाँ वह खुश नहीं थी, तो यह भी एक उत्सव ही है। मैं अपनी बेटी को कफ़न में घर वापस आते नहीं देख सकता था, इसलिए उसे मुस्कुराहट के साथ वापस लाया हूँ।"
यह बयान उन माता-पिता के गाल पर तमाचा है जो अपनी बेटियों को यह कहकर ससुराल वापस भेज देते हैं कि "अब तुम्हारी डोली उठी है, तो वहाँ से अर्थी ही उठनी चाहिए।" प्रणिता का स्वागत करने के लिए उनके भाई, मां और सगे-संबंधी भी ढोल की थाप पर थिरकते नजर आए। यह दृश्य देखकर मोहल्ले वाले भी दंग रह गए।
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WATCH NOWसोशल मीडिया पर उठी सराहना की लहर
जैसे ही **ZYRO NEWS 24** ने इस खबर को कवर किया, सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। लोग लिख रहे हैं कि "हर बेटी को ऐसा ही पिता मिलना चाहिए।" मेरठ की गलियों में गूँजती ढोल की आवाज ने उन दकियानूसी दीवारों को गिरा दिया है जो महिलाओं के अधिकारों और उनकी खुशी के बीच खड़ी थीं।
प्रणिता अब अपने जीवन की एक नई शुरुआत कर रही हैं। वह अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देंगी। उनका कहना है कि पिता के इस समर्थन ने उन्हें वो शक्ति दी है, जो शायद किसी और चीज से नहीं मिल सकती थी।
"मेरी खुशियाँ मेरे परिवार के लिए सर्वोपरि हैं। मैं खुश हूँ कि मैं एक ऐसे घर में वापस आई हूँ जहाँ मुझे बोझ नहीं, बल्कि सम्मान मिलता है।" - प्रणिता शर्मा
इस रिपोर्ट को लिखने का हमारा मकसद सिर्फ खबर देना नहीं, बल्कि उस बदलाव का हिस्सा बनना है जो समाज में अनिवार्य है। **शुभम त्रिपाठी** और **ZYRO NEWS 24** की टीम इस बहादुर पिता और उनकी साहसी बेटी को सलाम करती है।
Managing Editor
Shubham Tripathi
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