25 साल बाद दबोचा गया संदीप बंसल का कातिल सलीम खान: मार्शल आर्ट ट्रेनर से यूट्यूबर बनने का सनसनीखेज खुलासा!
मार्शल आर्ट ट्रेनर से यूट्यूबर और फिर जेल: 25 साल बाद खत्म हुई 'सलीम वास्तिक' की फरारी, 13 साल के संदीप के कत्ल की वो खौफनाक कहानी!
Managing Editor
Shubham TripathiSource
ZYRO NEWS 24(ज़ायरो न्यूज़ 24 विशेष रिपोर्ट): कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है। दिल्ली पुलिस ने 25 साल से फरार चल रहे उम्रकैद के सजायाफ्ता मुजरिम सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। 1995 में एक मासूम की हत्या करने वाला सलीम, एक नई पहचान के साथ यूट्यूबर बनकर समाज के बीच घूम रहा था।
नई दिल्ली: साल 1995 की वो सर्द सुबह, जब दिल्ली के दरियागंज इलाके में एक हँसता-खेलता परिवार तबाह हो गया था। सीमेंट व्यापारी सीताराम का 13 साल का बेटा संदीप बंसल स्कूल के लिए निकला, लेकिन घर वापस नहीं आया। उस मासूम का कसूर सिर्फ इतना था कि उसके पिता के पास पैसा था और उसके मार्शल आर्ट ट्रेनर सलीम खान की नीयत में खोट आ गया था।
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अभी खरीदेंफिरौती के 30 हजार और नाले में मिली संदीप की लाश
20 जनवरी 1995 को संदीप के गायब होने के अगले दिन पिता सीताराम के पास एक कॉल आई। दूसरी तरफ से भारी आवाज में संदीप की जान की कीमत 30 हजार रुपए मांगी गई। फिरौती की रकम को लोनी फ्लाईओवर पर बागपत जाने वाली बस में रखने को कहा गया। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो पता चला कि संदीप आखिरी बार अपने स्कूल के मार्शल आर्ट ट्रेनर सलीम खान के साथ एक रिक्शे में देखा गया था।
पुलिस ने जब सलीम को हिरासत में लिया और सख्ती से पूछताछ की, तो उसने सब कुछ उगल दिया। सलीम ने ही नाले में पड़ी संदीप की लाश बरामद कराई। उस वक्त देश दहल गया था कि कैसे एक गुरु ने ही अपने शिष्य का अपहरण कर उसकी जान ले ली। 5 अगस्त 1997 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने सलीम खान और उसके साथी अनिल को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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सलीम खान को 24 नवंबर 2000 को दिल्ली जेल से अंतरिम बेल मिली। इसके बाद वह कभी कोर्ट नहीं लौटा। वह दिल्ली से भागकर करनाल और अंबाला गया, जहाँ उसने अलमारी बनाने का काम किया। 2010 में वह गाजियाबाद आ गया और खुद को 'सलीम वास्तिक' के रूप में नई पहचान दी। उसने रेडीमेड कपड़ों की दुकान खोली और सोशल मीडिया के दौर में वह एक 'यूट्यूबर' बन गया।
हाल ही में गाजियाबाद में सलीम पर जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसमें पुलिस ने दो आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया था। इसी घटना के बाद सलीम पुलिस की नजर में आया और उसकी असली पहचान का खुलासा हुआ। आज दिल्ली पुलिस ने उसे वापस तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।
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"मुजरिम चाहे कितनी भी दूर भाग जाए, कानून की नज़र से नहीं बच सकता।"
- शुभम त्रिपाठी, मैनेजिंग एडिटर, ज़ायरो न्यूज़ 24



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