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लखनऊ-बाराबंकी ऑनर किलिंग: पिता ने बेटी का गला घोंटा, चेहरे पर तेजाब डालकर बाराबंकी में फेंकी लाश! (महा-खुलासा)

 

Ai जनरेटेड photo 

EXCLUSIVE EXPOSE रिश्तों का कत्ल: झाड़-फूंक के बहाने ले जाकर पिता ने ही बुझा दिया घर का चिराग!

वंदना चौबे हत्याकांड: लखनऊ से बाराबंकी तक फैला 'ऑनर किलिंग' का खौफनाक जाल, कातिल पिता की रूह कंपा देने वाली कहानी!

Managing Editor

Shubham Tripathi

Media House

ZYRO NEWS 24

"पापा आज मुझे झाड़-फूंक कराने के लिए बाहर ले जा रहे हैं..." 16 साल की वंदना चौबे ने जब अपने दोस्त को ये आखिरी शब्द कहे, तो उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस पिता की उंगली पकड़कर उसने दुनिया देखी, वही उसकी दुनिया उजाड़ने वाला है। लखनऊ की गलियों से शुरू हुई यह साजिश बाराबंकी के सुनसान जंगलों में एक मासूम की चीख के साथ खत्म हुई।

लखनऊ/बाराबंकी (ज़ायरो न्यूज़ 24): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और पड़ोसी जिले बाराबंकी की सीमा पर स्थित एक सुनसान इलाके में जब पुलिस को एक किशोरी की जली हुई लाश मिली, तो किसी ने नहीं सोचा था कि इस जघन्य अपराध के पीछे कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि घर का ही 'अन्नदाता' होगा। विजय चौबे, जिसे अपनी बेटी का ढाल होना चाहिए था, वही उसका जल्लाद बन गया।

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साजिश की परतें: IGRS का ढोंग और पुलिस की चुनौती

विजय चौबे एक शातिर अपराधी की तरह सोच रहा था। उसने वंदना की हत्या करने के बाद तुरंत खुद को पीड़ित दिखाने का नाटक शुरू कर दिया। उसने उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर एक शिकायत दर्ज कराई कि उसकी 16 वर्षीय बेटी अचानक लापता हो गई है। वह पुलिस स्टेशनों के चक्कर काट रहा था, आंसू बहा रहा था और अपनी बेटी को खोजने की गुहार लगा रहा था। लेकिन ज़ायरो न्यूज़ 24 की तफ्तीश बताती है कि पुलिस की पैनी नज़रों ने विजय के चेहरे पर छिपे डर को भांप लिया था।

बाराबंकी पुलिस को जब शिनाख्त मिटाने के लिए चेहरे पर तेजाब डली हुई एक लाश मिली, तो केस उलझ गया था। लाश की पहचान करना लगभग नामुमकिन था। लेकिन लखनऊ से बाराबंकी के बीच पड़ने वाले हर सीसीटीवी और लापता लड़कियों की फाइल खंगाली गई। इसी बीच पुलिस को वंदना के उस दोस्त का पता चला जिससे वह पिछले साल संपर्क में थी।


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'आखिरी कॉल' जिसने कातिल पिता का नकाब उतार दिया

जब पुलिस ने उस लड़के से पूछताछ की, तो उसने एक ऐसा चौंकाने वाला सुराग दिया जिसने पूरी कहानी पलट दी। लड़के ने बताया कि वंदना ने मरने से कुछ देर पहले उसे फोन किया था। उसने कहा था, "पापा मुझे किसी तांत्रिक के पास झाड़-फूंक के लिए ले जा रहे हैं।" पुलिस के लिए यह सुराग सोने की खदान जैसा था। अगर वंदना अपने पिता के साथ गई थी, तो फिर वह गायब कैसे हो गई?

बाराबंकी पुलिस ने जब विजय चौबे को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसकी आवाज़ लड़खड़ाने लगी। चंद घंटों की पूछताछ के बाद विजय टूट गया और उसने अपना गुनाह कुबूल कर लिया। उसने बताया कि वंदना का किसी लड़के के साथ जाना उसे अपनी 'मर्दानगी' और 'इज्जत' पर चोट लगा था। उसने इसे 'ऑनर' का मामला बना लिया और अपनी ही कोख को उजाड़ने का फैसला कर लिया।

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तेजाब का इस्तेमाल और दोस्त अब्दुल मन्नान का रोल

ज़ायरो न्यूज़ 24 की विशेष रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि विजय अकेले इस काम को अंजाम नहीं दे सकता था। उसने अपने दोस्त अब्दुल मन्नान को अपनी साजिश में शामिल किया। दोनों ने मिलकर वंदना का गला घोंटा और फिर वहशीपन की सारी हदें पार करते हुए उसके चेहरे पर तेजाब डाल दिया। यह कृत्य इसलिए किया गया ताकि पहचान पूरी तरह मिट जाए और पुलिस इसे एक अज्ञात हत्या मानकर फाइल बंद कर दे।

आज वंदना चौबे हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका यह केस समाज की उस बीमार मानसिकता को दर्शाता है जहाँ 'इज्जत' का पैमाना बेटियों की जान से बड़ा हो जाता है। पुलिस ने विजय चौबे और अब्दुल मन्नान दोनों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। बाराबंकी पुलिस अब इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कड़ी सजा दिलाने की तैयारी कर रही है।

ज़ायरो न्यूज़ 24 पूछता है—क्या ऐसी इज्जत का कोई वजूद है जो खून से रंगी हो?
- शुभम त्रिपाठी

ZYRO NEWS 24

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© 2026 ZYRO MEDIA GROUP | मुख्य संपादक: शुभम त्रिपाठी | स्थान: लखनऊ/बाराबंकी

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