बेंगलुरु: लक्षय मिश्रा की मौत पर पिता का बड़ा आरोप, 9वीं मंजिल से गिरना साज़िश? मणिपाल कॉलेज प्रशासन पर उठे सवाल!
मणिपाल इंस्टीट्यूट छात्र मौत मामला: 9वीं मंजिल से गिरना या साजिश? खिड़कियों की बनावट पर पिता ने उठाए सवाल, कॉलेज प्रशासन के दावों को नकारा!
बेंगलुरु के प्रतिष्ठित मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे छात्र समुदाय और अभिभावकों को डरा दिया है। इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के होनहार छात्र लक्षय मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। जहाँ कॉलेज प्रशासन इसे महज एक हादसा या आत्महत्या का रूप देने की कोशिश कर रहा है, वहीं रांची से बेंगलुरु पहुँचे लक्षय के पिता अंजनी कुमार मिश्रा ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे एक 'साजिश' करार दिया है।
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अभी खरीदें (Grab Now)खिड़कियाँ और बनावट: पिता ने बेनकाब किए कॉलेज के दावे
लक्षय के पिता अंजनी कुमार मिश्रा का कहना है कि जब उन्हें सूचित किया गया कि उनका बेटा 9वीं मंजिल से गिर गया है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। लेकिन जब उन्होंने मौके पर पहुँचकर हॉस्टल के कमरे और खिड़कियों का मुआयना किया, तो उनकी आँखों ने कुछ और ही सच बयां किया। अंजनी कुमार के अनुसार, खिड़कियों की बनावट और वहां की सुरक्षा ग्रिल ऐसी है कि कोई भी छात्र वहां से गलती से गिर ही नहीं सकता।
पिता ने भावुक होते हुए कहा, "मेरा बेटा मानसिक रूप से बहुत मजबूत था। उसे इंजीनियर बनने का सपना पूरा करना था। खिड़कियों की जो ऊंचाई और बनावट है, वहां से कूदना या गिरना नामुमकिन जैसा है।" पिता का सीधा आरोप है कि लक्षय की मौत किसी अन्य कारण से हुई है, जिसे कॉलेज प्रबंधन ने 'हादसे' का नाम देकर दबाने की कोशिश की है। क्या यह रैगिंग का मामला है या कुछ और? पुलिस अभी इस पर चुप्पी साधे हुए है।
संस्थान की भूमिका पर बड़े प्रश्नचिह्न
इतने बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने का दावा किया जाता है। फिर एक छात्र 9वीं मंजिल से गिर कैसे गया? कॉलेज प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस को सूचना तो दी, लेकिन पिता का आरोप है कि उन्हें सही जानकारी देने में आनाकानी की गई। लक्षय के सहपाठियों से भी बात करने पर एक अजीब सी दहशत का माहौल देखने को मिल रहा है, मानो उन्हें कुछ न बोलने की हिदायत दी गई हो।
**ZYRO NEWS 24** की टीम ने जब स्थानीय सूत्रों से जानकारी जुटाई, तो पता चला कि छात्र की मौत के बाद संस्थान की छवि बचाने के लिए कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई है। सवाल यह है कि अगर कॉलेज बेगुनाह है, तो उसे पारदर्शी जांच से डर क्यों लग रहा है?
रांची से बेंगलुरु: एक पिता का इंसाफ के लिए संघर्ष
रांची से हजारों किलोमीटर दूर बेंगलुरु पहुँचे अंजनी कुमार मिश्रा अब दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उनके वीडियो संदेश ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। उन्होंने कर्नाटक सरकार और बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर से हाथ जोड़कर अपील की है कि उनके बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच हो और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ न की जाए।
अंजनी कुमार का कहना है, "मैंने अपना बेटा खो दिया, लेकिन मैं नहीं चाहता कि किसी और का लक्षय इस तरह व्यवस्था की भेंट चढ़े।" इस मामले ने एक बार फिर इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में छात्रों की सुरक्षा और वहां के आंतरिक दबावों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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**ZYRO NEWS 24** के मैनेजिंग एडिटर **शुभम त्रिपाठी** का मानना है कि प्रतिष्ठित संस्थानों में होने वाली ऐसी घटनाएं अक्सर रसूख के दम पर दबा दी जाती हैं। लक्षय मिश्रा की मौत के मामले में पुलिस को न केवल चश्मदीदों के बयान लेने चाहिए, बल्कि फॉरेंसिक जांच भी करानी चाहिए कि क्या गिरने से पहले लक्षय के साथ कोई हाथापाई हुई थी? कॉलेज प्रशासन की चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा कर रही है।
"इंसाफ केवल फाइलों में नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए। लक्षय के पिता की आंखों के आंसू बेंगलुरु पुलिस से सवाल कर रहे हैं।" - Shubham Tripathi, Managing Editor
लक्षय मिश्रा केस से जुड़ी हर बारीक अपडेट और पिता के संघर्ष की गूँज को हम आप तक पहुँचाते रहेंगे। जुड़े रहें **ज़ायरो न्यूज़ 24** के साथ।
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Shubham Tripathi
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