ईरान-इजरायल युद्ध का छठा दिन: यरूशलेम में मिसाइल हमले, अमेरिका का बड़ा फैसला और चीन की गिरती GDP | Zyro News 24
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Shubham Tripathi (Managing Editor)
Date: 5 मार्च, 2026
विश्व युद्ध की आहट? ईरान-इजरायल संघर्ष और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराते संकट की पूरी रिपोर्ट
दुनिया इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ शांति की अपीलें मिसाइलों के शोर में दबती जा रही हैं। आज 5 मार्च, 2026 को वैश्विक पटल पर ऐसी घटनाएँ घट रही हैं जो आने वाले कई दशकों तक मानवता और वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेंगी। Zyro News 24 की इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे उन खबरों को जिन्होंने आज दुनिया की नींद उड़ा दी है।
1. ईरान-इजरायल-अमेरिका: युद्ध के छठे दिन यरूशलेम में कोहराम
ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब एक पूर्णकालिक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है। आज युद्ध का छठा दिन है और स्थिति सामान्य होने के बजाय और भी भयावह हो गई है। बीती रात ईरान ने इजरायल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इजरायल के अभेद्य माने जाने वाले 'आयरन डोम' और 'एरो' डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें रिहायशी इलाकों के करीब गिरने में कामयाब रहीं।
यरूशलेम से ग्राउंड रिपोर्ट: शहर में आज सुबह से ही सायरन की आवाजें गूंज रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर के बाहरी इलाकों में भीषण धमाके सुने गए हैं। इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने नागरिकों को बंकरों में रहने की सलाह दी है। उधर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की, तो वे तेल अवीव को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर देंगे।
इस युद्ध में अमेरिका की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है। भूमध्य सागर में अमेरिकी विमानवाहक पोत की मौजूदगी ने संघर्ष को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध अगले 48 घंटों में नहीं रुका, तो इसमें लेबनान, सीरिया और यमन के विद्रोही गुट भी पूरी तरह कूद पड़ेंगे, जिससे यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो सकती है।
2. अमेरिकी सीनेट का बड़ा फैसला: ट्रंप के 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' को झटका
वाशिंगटन डीसी से आ रही खबर ने दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' (War Powers Resolution) को खारिज कर दिया है, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को सीमित करना या रोकना था।
सीनेट में हुई वोटिंग के दौरान इस विधेयक के पक्ष में 47 वोट पड़े, जबकि विरोध में 53 वोट आए। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि राष्ट्रपति के पास अब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की विधायी शक्ति बनी रहेगी। विपक्ष का तर्क था कि युद्ध को रोकना वैश्विक शांति के लिए जरूरी है, लेकिन सत्ता पक्ष और कुछ निर्दलीय सीनेटरों ने तर्क दिया कि इस समय पीछे हटना अमेरिकी कमजोरी के रूप में देखा जाएगा और इससे ईरान का मनोबल बढ़ेगा।
इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला ट्रंप प्रशासन को मिडिल ईस्ट में अपनी रणनीतियों को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू करने की खुली छूट देता है।
3. नेपाल चुनाव: लोकतंत्र की नई परीक्षा, मतदान शुरू
पड़ोसी देश नेपाल में आज एक ऐतिहासिक दिन है। पिछले साल देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के बाद आज नेपाल में आम चुनावों के लिए मतदान शुरू हो गया है। हिमालयी राष्ट्र की जनता अपनी नई सरकार चुनने के लिए लंबी कतारों में खड़ी है।
नेपाल चुनाव आयोग के अनुसार, सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और भारत-नेपाल सीमा को 72 घंटों के लिए सील कर दिया गया है। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तय करेगा कि नेपाल का झुकाव भविष्य में भारत की ओर रहेगा या चीन की ओर। पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की आंतरिक राजनीति में विदेशी शक्तियों का हस्तक्षेप चर्चा का विषय रहा है।
युवा मतदाताओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। उनकी मुख्य मांगें आर्थिक सुधार, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन हैं। दोपहर 12 बजे तक करीब 35% मतदान की खबरें आ रही हैं। शाम तक यह आंकड़ा 70% तक पहुंचने की उम्मीद है।
4. चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती: 2026 के लिए जीडीपी लक्ष्य घटाया
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। बीजिंग में आयोजित नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की वार्षिक बैठक के दौरान, चीनी सरकार ने वर्ष 2026 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के विकास लक्ष्य को घटाकर 4.5% से 5% के बीच तय किया है।
पिछले एक दशक में यह चीन के सबसे निचले लक्ष्यों में से एक है। चीन की इस सुस्ती के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:
- प्रॉपर्टी संकट: चीन का रियल एस्टेट सेक्टर अब भी भारी कर्ज के नीचे दबा हुआ है।
- वैश्विक मांग में कमी: पश्चिम के साथ बढ़ते तनाव और ट्रेड वॉर के कारण चीनी निर्यात पर असर पड़ा है।
- जनसांख्यिकीय बदलाव: चीन की बढ़ती बुजुर्ग आबादी और घटती वर्कफोर्स एक बड़ी चुनौती बन गई है।
संपादकीय निष्कर्ष: आज की ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि 2026 का यह साल स्थिरता के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। एक तरफ युद्ध की विभीषिका है, तो दूसरी तरफ लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ और आर्थिक बदलाव। Zyro News 24 पल-पल की जानकारी आप तक पहुंचाता रहेगा।




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