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​शिक्षा का मंदिर शर्मसार: 'नहा कर आई हो तो Kiss दे दो', हरदोई में गुरुजी की घिनौनी करतूत; छात्राएं बोलीं- सर नाभि में हाथ डालते हैं

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लेखक: शुभम त्रिपाठी
प्रबंध संपादक, Zyro News 24
📅 24 फरवरी, 2026 📍 हरदोई, उत्तर प्रदेश




हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आई है, जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है, बल्कि 'गुरु-शिष्य' के उस पवित्र रिश्ते पर भी कालिख पोत दी है जिसे समाज में ईश्वर से ऊपर का दर्जा दिया जाता है। माधोगंज विकास खंड के एक सरकारी कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में जो हुआ, वह सुनकर किसी भी पिता का खून खौल उठेगा और किसी भी मां की रूह कांप जाएगी। यहाँ एक 'इंचार्ज शिक्षक' योगेश कुमार पर छात्राओं ने ऐसे घिनौने आरोप लगाए हैं, जो किसी सभ्य समाज की कल्पना से परे हैं।

घटना का सूत्रपात: जब चुप्पी टूटी और सच बाहर आया

​यह मामला तब तक विद्यालय की चारदीवारी के भीतर दबा हुआ था, जब तक कि उन मासूम बच्चियों ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी थी। दरअसल, इस घिनौने कांड का पर्दाफाश तब हुआ जब दो सगी बहनों ने हिम्मत जुटाकर अपने पिता को शिक्षक की करतूतों के बारे में बताया। पिता ने बिना समय गंवाए खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से शिकायत की।

​जैसे ही जांच की आंच स्कूल तक पहुँची, मानो शिकायतों का सैलाब आ गया। एक के बाद एक, कई छात्राओं ने सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई। Zyro News 24 के पास मौजूद विवरण के अनुसार, छात्राओं ने आरोप लगाया कि शिक्षक योगेश कुमार क्लास में पढ़ाने के बजाय अश्लील बातें करता था और छात्राओं को डरा-धमकाकर रखता था।

"नहा कर आई हो तो चुम्मा दे दो..." – बेशर्मी की सारी हदें पार

​छात्राओं ने जांच अधिकारियों के सामने जो बयान दर्ज कराए हैं, वे किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षक छात्राओं से पूछता था कि "क्या आज तुम नहा कर आई हो?"। जब मासूम छात्राएं मासूमियत में 'हां' कहती थीं, तो शिक्षक का जवाब होता था, "तो फिर एक चुम्मा (Kiss) दे दो।"

​यह केवल शब्दों की बेशर्मी नहीं थी, बल्कि यह एक गहरी विकृत मानसिकता का परिचायक था। एक गुरु, जिसका काम बच्चियों को संस्कार देना और समाज में सिर उठाकर जीना सिखाना था, वही उन्हें अपनी हवस भरी बातों का शिकार बना रहा था।

हरदोई के माधोगंज में शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाला मामला सामने आया है...

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छात्राओं ने बताया कि शिक्षक योगेश कुमार उनसे अश्लील बातें करता था और उन्हें गलत तरीके से छूता था...

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जांच के दौरान छात्राओं ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है...

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प्रशासन ने आरोपी शिक्षक को निलंबित कर दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

बैड टच और नाभि में उंगली: रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा

​इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और घृणित खुलासा कक्षा 8 की एक छात्रा ने किया। उस बच्ची ने रोते हुए बताया कि "सर ने मुझे पूरी कक्षा के सामने अपनी गोद में बैठा लिया। इसके बाद उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और मेरी नाभि में उंगली डाल दी।" सोचिए उस बच्ची पर क्या गुजरी होगी, जिसे उसके सहपाठियों के सामने इस तरह प्रताड़ित किया गया। वहीं, कक्षा 6 की एक अन्य छात्रा ने बताया कि जब कमरे में कोई नहीं होता था, तब शिक्षक उसके गालों को गंदी तरह से छूता था और उसकी कमर को दबोचता था। छात्राओं ने अपनी लिखित शिकायत में 'बैड टच', 'अश्लील भाषा' और 'अश्लील ऑफर' जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल किया है।



प्रशासनिक कार्रवाई: निलंबन तो हुआ, पर क्या इंसाफ मिला?

​मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) प्रभास कुंवर श्रीवास्तव ने त्वरित कार्रवाई की है। खंड शिक्षा अधिकारी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में शिक्षक को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया, जिसके बाद उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।

​प्रभारी BSA ने अपने बयान में कहा:

"यह घटना अत्यंत निंदनीय है। विद्यालय जैसे पवित्र स्थान पर बच्चियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। आरोपी शिक्षक योगेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है और उसे BEO कार्यालय से संबद्ध किया गया है। बिलग्राम और पिहानी के खंड शिक्षा अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की गई है जो मामले की तह तक जाएगी।"


Zyro News 24 का कड़ा सवाल: सिर्फ निलंबन ही क्यों?

​प्रबंध संपादक के रूप में, मैं शुभम त्रिपाठी शासन और प्रशासन से कुछ कड़े सवाल पूछना चाहता हूं। क्या एक ऐसा व्यक्ति, जो छोटी बच्चियों के साथ शारीरिक छेड़छाड़ और अश्लील बातें करता है, केवल निलंबन का हकदार है? क्या ऐसे व्यक्ति को समाज में खुलेआम घूमने की आजादी होनी चाहिए?

  1. पॉक्सो एक्ट (POCSO) कहां है?: जब मामला नाबालिग छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न और बैड टच का है, तो अब तक आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल क्यों नहीं भेजा गया?
  2. मानसिक जांच: क्या विभाग शिक्षकों की नियुक्ति या प्रमोशन के समय उनके मानसिक स्वास्थ्य की कोई जांच करता है? योगेश कुमार जैसे लोग 'शिक्षक' कहलाने के लायक नहीं हैं।
  3. महिला अध्यापिका की भूमिका: स्कूल में महिला सहायक अध्यापक भी मौजूद थीं। क्या उन्हें कभी इस बात की भनक नहीं लगी? क्या स्कूल में कोई 'शिकायत पेटी' या सुरक्षित माहौल नहीं था जहाँ बच्चियां अपनी बात कह सकें?

समाज और अभिभावकों के लिए एक संदेश

​हरदोई की यह घटना हम सभी के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। हम अपनी बेटियों को बड़े भरोसे के साथ स्कूल भेजते हैं, लेकिन अगर वहां भी वे सुरक्षित नहीं हैं, तो यह व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे प्रतिदिन अपने बच्चों से बात करें, उन्हें 'गुड टच' और 'बैड टच' के बारे में शिक्षित करें और उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि वे किसी भी बात को बिना डरे साझा कर सकते हैं।

​उत्तर प्रदेश सरकार की 'मिशन शक्ति' योजना तभी सफल मानी जाएगी जब स्कूलों के भीतर छिपे इन भेड़ियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। Zyro News 24 इस मामले की लगातार पैरवी करता रहेगा। हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक आरोपी योगेश कुमार को सलाखों के पीछे नहीं भेज दिया जाता।

निष्कर्ष

​हरदोई की छात्राओं ने जो साहस दिखाया है, वह काबिले तारीफ है। उनकी एक शिकायत ने शायद कई अन्य बच्चियों का भविष्य बर्बाद होने से बचा लिया। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल आरोपी को बर्खास्त करे, बल्कि उस पर ऐसी कानूनी कार्रवाई करे जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन जाए।

Zyro News 24 हर उस बेटी के साथ खड़ा है जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती है। हम मांग करते हैं कि इस मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और बच्चियों को न्याय मिले।

बने रहिए Zyro News 24 के साथ, क्योंकि हम सिर्फ खबर नहीं दिखाते, हम हकीकत से रूबरू कराते हैं।

- शुभम त्रिपाठी (Managing Editor)

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