डिजिटल अरेस्ट का बड़ा खेल: लखनऊ में रिटायर इंस्पेक्टर से 80 लाख की ठगी की कोशिश, ATS अफसर बनकर किया था वीडियो कॉल
सावधान: लखनऊ के रिटायर इंस्पेक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' कर ठगने की कोशिश, बैंक कर्मचारियों की सूझबूझ से बचे 80 लाख रुपये
लखनऊ | Zyro News 24 रिपोर्ट: शुभम त्रिपाठी (मैनेजिंग एडिटर)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों का एक ऐसा खौफनाक चेहरा सामने आया है, जिसने सुरक्षा और कानून व्यवस्था के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। नगर निगम के एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर, छेदीलाल, जो अपनी पूरी जिंदगी कानून की मर्यादा में रहे, उन्हें जालसाजों ने 'टेरर फंडिंग' और 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर 80 लाख रुपये की चपत लगाने की पूरी तैयारी कर ली थी। लेकिन ऐन वक्त पर बैंक कर्मचारियों की सतर्कता ने इस बड़ी ठगी को नाकाम कर दिया।
कैसे शुरू हुआ 'डिजिटल अरेस्ट' का ये खूनी खेल?
घटना उस वक्त शुरू हुई जब रिटायर्ड इंस्पेक्टर छेदीलाल अपने निजी काम से बैंक के लिए निकले थे। रास्ते में उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आती है। फोन करने वाला शख्स खुद को ATS पुणे का इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताता है। आरोपी ने बेहद कड़क आवाज में छेदीलाल से कहा, "आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक बैंक खाता खोला गया है, जिससे 40 लाख रुपये की टेरर फंडिंग (आतंकी वित्तपोषण) हुई है।"
यह सुनते ही छेदीलाल के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपराधी ने उन्हें डराने के लिए 'डिजिटल अरेस्ट' शब्द का इस्तेमाल किया और सख्त हिदायत दी कि जब तक जांच चल रही है, वे किसी से भी बात नहीं करेंगे, अन्यथा उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलेगा।
वर्दी पहनकर DIG बन किया वीडियो कॉल
जालसाजों ने ठगी के इस जाल को इतना असली बनाया कि छेदीलाल चाहकर भी शक नहीं कर पाए। कॉल पर एक दूसरा व्यक्ति आया जो पुलिस की वर्दी में था और खुद को DIG ATS बता रहा था। उसने वीडियो कॉल के जरिए छेदीलाल से उनकी बैंक डिटेल्स, FD की जानकारी और कुल जमा पूंजी का ब्योरा ले लिया।
जालसाज ने झांसा दिया कि "जांच की प्रक्रिया के तहत आपको अपनी रकम कुछ चुनिंदा सरकारी खातों में ट्रांसफर करनी होगी। अगर आप निर्दोष पाए गए, तो पैसा वापस कर दिया जाएगा। वरना पुलिस आपके घर आएगी और आपको जेल जाना होगा।"
बैंक के कोने में रो पड़े बुजुर्ग, कर्मचारियों ने बचाई गाढ़ी कमाई
दहशत में आए छेदीलाल बैंक पहुंचे और कोने में बैठकर करीब 80 लाख रुपये ट्रांसफर करने की तैयारी करने लगे। उनकी घबराहट देखकर बैंक के एक कर्मचारी को शक हुआ। जब कर्मचारी ने उनसे परेशानी पूछी, तो पहले तो वे डर के मारे चुप रहे, लेकिन एक परिचित कर्मचारी के कुरेदने पर उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और उन्होंने पूरी कहानी सुनाई।
बैंक स्टाफ तुरंत समझ गया कि यह 'डिजिटल अरेस्ट' वाला फ्रॉड है। कुछ ही मिनटों बाद जब ठगों का दोबारा वीडियो कॉल आया, तो बैंक कर्मचारियों ने फोन लेकर उन्हें जमकर फटकार लगाई। अपनी पोल खुलती देख साइबर ठगों ने तुरंत फोन काट दिया।
शुभम त्रिपाठी (मैनेजिंग एडिटर, Zyro News 24) की अपील:
"डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई भी कानूनी प्रावधान भारत में नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी—चाहे वह पुलिस हो, CBI हो या ED—वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। अगर आपके पास ऐसी कोई कॉल आती है, तो तुरंत घबराएं नहीं, अपने परिजनों को बताएं और 1930 पर साइबर क्राइम की रिपोर्ट दर्ज करें। आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है।"
संपादकीय नोट: यह खबर Zyro News 24 के मैनेजिंग एडिटर शुभम त्रिपाठी द्वारा कवर की गई है। हमारा उद्देश्य समाज को इन नए तरीके के साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना है।
सावधान रहें: कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी या पैसे के लेन-देन की बात नहीं करती। किसी भी संदिग्ध कॉल की शिकायत तुरंत 1930 पर करें।
संपादकीय नोट: यह खबर Zyro News 24 के मैनेजिंग एडिटर शुभम त्रिपाठी द्वारा कवर की गई है। हमारा उद्देश्य समाज को इन नए तरीके के साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना है।
सावधान रहें: कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी या पैसे के लेन-देन की बात नहीं करती। किसी भी संदिग्ध कॉल की शिकायत तुरंत 1930 पर करें।



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