रेल रक्षक ही बना भक्षक: अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस में TTE की दरिंदगी, NCC कैडेट के साथ AC कोच में किया दुष्कर्म
By: शुभम त्रिपाठी (प्रबंध संपादक) Zyro News 24 – खबर जो सच दिखाए।
गोरखपुर/लखनऊ: भारतीय रेलवे, जिसे देश की लाइफलाइन कहा जाता है, आज एक ऐसी शर्मनाक घटना का गवाह बनी है जिसने यात्रियों की सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। अहमदाबाद से चलकर गोरखपुर आने वाली एक्सप्रेस ट्रेन (19489) के एसी कोच में एक टीटीई (TTE) ने मानवता को शर्मसार करते हुए एक एनसीसी (NCC) कैडेट छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। यह घटना न केवल रेलवे प्रशासन के चेहरे पर कालिख पोतती है, बल्कि सफर कर रही करोड़ों महिलाओं के मन में असुरक्षा का गहरा खौफ पैदा करती है।
घटना का विस्तृत विवरण: परीक्षा देकर लौट रही थी छात्रा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता एक होनहार छात्रा है और एनसीसी (National Cadet Corps) की कैडेट है। वह मऊ में आयोजित एनसीसी 'सी' सर्टिफिकेट की कठिन परीक्षा देने गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब वह वापस लौटने के लिए स्टेशन पहुंची, तो वहां भारी भीड़ थी। भीड़ और जल्दबाजी के कारण वह अपना रेल टिकट नहीं ले सकी।
छात्रा अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस के एक एसी (AC) कोच में सवार हो गई। उसे उम्मीद थी कि ट्रेन के भीतर टीटीई से मिलकर वह अपना नियमानुसार जुर्माना भरकर रसीद कटवा लेगी और सुरक्षित घर पहुँच जाएगी। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस वर्दी पर भरोसा कर वह मदद की उम्मीद कर रही थी, वही उसकी अस्मत का दुश्मन बन जाएगा।
मदद के बहाने बिछाया 'दरिंदगी' का जाल
ट्रेन जब अपनी गति से दौड़ रही थी, तभी ड्यूटी पर तैनात टीटीई राहुल कुमार टिकट चेक करने पहुंचा। जब उसने छात्रा को बिना टिकट पाया, तो छात्रा ने अपनी मजबूरी बताई और टिकट बनाने का अनुरोध किया। सूत्रों के अनुसार, आरोपी राहुल कुमार ने छात्रा की लाचारी का फायदा उठाने की योजना बनाई। उसने छात्रा को भरोसा दिलाया कि वह उसे एक खाली बर्थ (सीट) दिला देगा ताकि वह आराम से सफर कर सके।
टीटीई उसे अटेंडेंट केबिन या टीटीई के लिए आरक्षित विशेष कूपे की ओर ले गया। जैसे ही छात्रा वहां पहुंची, आरोपी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और छात्रा के साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। छात्रा के विरोध और चीख-पुकार को ट्रेन के शोर और बंद केबिन ने दबा दिया।
पीड़िता की बहादुरी और पुलिसिया कार्रवाई
घटना के बाद पीड़िता गहरे सदमे में थी, लेकिन उसने हार नहीं मानी। जैसे ही ट्रेन गोरखपुर पहुंची, उसने हिम्मत जुटाई और सीधे जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) थाने जाकर अपनी आपबीती सुनाई। छात्रा के बयान सुनकर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
एसपी जीआरपी (गोरखपुर), लक्ष्मी निवास मिश्र ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया को बताया:
"छात्रा की तहरीर के आधार पर आरोपी टीटीई राहुल कुमार के खिलाफ दुष्कर्म और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसे हर संभव कानूनी सहायता दी जा रही है।"
आरोपी फरार, पुलिस ने घोषित किया इनाम
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी राहुल कुमार फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं। रेलवे विभाग ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी टीटीई को सेवा से निलंबित (Suspend) कर दिया है। पुलिस ने आरोपी की सूचना देने वाले के लिए 10,000 रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है।
रेलवे सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब रेलवे के भीतर महिलाओं के साथ इस तरह की वारदात हुई है, लेकिन जब रक्षक (रेलवे कर्मचारी) ही भक्षक बन जाए, तो जनता किस पर भरोसा करे?
- एसी कोच में सुरक्षाकर्मी कहाँ थे? हर लंबी दूरी की ट्रेन में आरपीएफ (RPF) के जवान तैनात होते हैं, फिर भी एक सरकारी कर्मचारी चलती ट्रेन में इस तरह का अपराध कैसे कर गया?
- सीसीटीवी का अभाव: ट्रेनों के कोच के भीतर या गलियारों में पर्याप्त निगरानी की कमी अपराधियों के हौसले बुलंद करती है।
- बिना टिकट यात्रियों की मजबूरी: क्या बिना टिकट यात्रा करना इतना बड़ा अपराध है कि एक कर्मचारी किसी महिला की अस्मत से खिलवाड़ कर सके?
संपादकीय टिप्पणी: सिस्टम को जागना होगा (Zyro News 24 Special)
शुभम त्रिपाठी, मैनेजिंग एडिटर: "यह केवल एक छात्रा के साथ हुआ अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे सिस्टम की विफलता है। एक एनसीसी कैडेट, जो देश सेवा का सपना देख रही है, अगर वह भी एक सरकारी कर्मचारी से सुरक्षित नहीं है, तो आम महिलाओं की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है। रेल मंत्रालय और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को इस मामले का कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। केवल निलंबन काफी नहीं है, ऐसी सजा दी जानी चाहिए जो नजीर बने। Zyro News 24 मांग करता है कि आरोपी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए पीड़िता को न्याय मिले।"
निष्कर्ष
इस दुखद घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थान अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। समाज और सरकार को मिलकर ऐसे 'भेड़ियों' के खिलाफ सख्त रुख अपनाना होगा जो वर्दी की आड़ में अपनी गंदी मानसिकता को छिपाए बैठे हैं।
हम पीड़िता के साहस को सलाम करते हैं और न्याय की इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं।
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नोट: यह समाचार रिपोर्ट मीडिया स्रोतों और आधिकारिक पुलिस बयानों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और पीड़िता को न्याय दिलाने की मुहिम का समर्थन करना है।
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